A2Z सभी खबर सभी जिले की

होली से पहले यूपी में गहराया ‘चुनावी’ रंग, 2027 की सियासी बिसात पर सभी दल सक्रिय

लखनऊ।

होली से पहले यूपी में गहराया ‘चुनावी’ रंग, 2027 की सियासी बिसात पर सभी दल सक्रिय

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। होली से पहले ही सियासी रंग गहराने लगे हैं और सभी प्रमुख दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं। पिछले एक महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के लगातार दौरों से चुनावी माहौल गर्माता नजर आ रहा है।

भाजपा ने मथुरा को अयोध्या के बाद हिंदुत्व की अगली बड़ी प्रयोगशाला के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि मथुरा आगामी चुनावों में एक अहम केंद्र बिंदु रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी के हालिया संबोधनों में बिजली पासी, बिरसा मुंडा, महाराजा सुहेलदेव, निषादराज और चौरी-चौरा के बलिदानियों का उल्लेख कर सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश साफ दिखाई दी। इसे सपा के PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की रणनीतिक काट के रूप में देखा जा रहा है।

वहीं समाजवादी पार्टी प्रयागराज में संतों और पुलिस के बीच हुए विवाद को राजनीतिक मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। पार्टी इस मामले को धार्मिक भावनाओं और प्रशासनिक सख्ती से जोड़कर भुनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

इधर बसपा भी नए सिरे से ब्राह्मण वोट बैंक पर फोकस करती दिख रही है। पार्टी प्रमुख मायावती के हालिया बयान—“ब्राह्मणों का सम्मान सिर्फ बसपा में सुरक्षित है”—ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। इसके साथ ही राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद के प्रदेश दौरों की रणनीति भी तैयार की जा रही है।

कांग्रेस को झटका देते हुए पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के पार्टी छोड़ने से विपक्षी खेमे की मुश्किलें और बढ़ी हैं। कुल मिलाकर, यूपी की राजनीति एक बार फिर ‘पावर हाउस’ की भूमिका में नजर आ रही है, जहां 2027 की लड़ाई के लिए सियासी शतरंज पर मोहरे तेजी से बिछाए जा रहे हैं।

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!